पहचान
ये जो ज़ुल्फ़ें बेफ़िक्र सी लहरा रहीं ,तुम्हारी पहचान नहीं
ये काली आँखे भी तुम्हारी पहचान नहीं
ये मुस्कुराहट जो तुम्हारे गालों पर सुंदर सा गढ्ढा कर दे
वो भी तुम्हारी पहचान नहीं
ये जो रेशम तुम लपेटे हो
ये तुम्हारी पहचान नहीं
ये जो दौलत से तुम लदे हो
ये भी तुम्हारी पहचान नहीं
महँगी गाड़ियों में सफ़र करते हो ग़र
ये तुम्हारी पहचान नहीं
ऐशों आराम में रहना भी तुम्हारी पहचान नहीं
जो प्यार से दो लफ़्ज़ बोल दो , ये तुम्हारी पहचान है
कभी किसी को सहारा दे दो, वही तुम्हारी पहचान है
कभी बच्चों के साथ जी भर के हँस खेल लो वही तुम्हारी पहचान है
जो इंसान को इंसान समझो,वही तुम्हारी पहचान है
पर बदक़िस्मती है ये
तुम पहचाने जाते हो उन सब बातों से
जो तुम हो ही नहीं
और जो हो
वही पहचान गुमनाम हो जाती है ✍️✍️✍️✍️
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